समाजिक विषय -: बुढ़ापे में बुजुर्गो की जीवन शैली !
इन्सान जब जन्म लेता है तो वह अपनी जीवन के रेखा भी ले कर आता है । अपनी जवानी को पार करते हुवे जीवन के खट्टे-मीठे स्वाद को चखते हुवे एक दिन वो बुढ़ापा की और ढ़ल जाता है।
बुढ़ापा जीवन किसी की सुखी से गुजर जाती है और किसी की जीवन कष्ट दायक होती है ।
अक्सर कष्ट दायक जीवन इन्सान अपनी गलती से झेलता है।
वो जवानी के खान-पान से बुढ़ापे में तकलीफ झेल सकता है।
या जवानी में कुछ कमाया ना हो तो भी बुढ़ापे में तकलीफ
झेल सकते हो।
या किसी के एक बच्चे की चाहत से आपकी बुढ़ापा कष्ट दायक हो सकती है अक्सर जवानी में हम देखते आये है। जिनके दो या अधिक बच्चे हो वो जवानी में किसी के बच्चे के साथ अच्छा व्यवहार कर लेते है। और जब बुढ़ापा आता है कई बार वो बच्चा माँ बाप को किनारा कर देते है। जिस कारण बुढ़ापे में उनकी जीवन नरक बन जाती है ।
अक्सर एकलौता बच्चों के होने से भी बुढ़ापा जीवन कष्ट दायक बन जाती है। कई बार एक लोता बेटा अपनी कमाई के लिये घर से दूर या विदेश भी जाते है और सालों-सालों तल घर नहीं आते अक्सर कई तो वही बस जाते है। और बुढ़ापे में जीवन तकलीफ दायक हो जाती है ।
बुढ़ापे में जीवन को सुख दायक बनाने के लिये खान-पान को सही रखें योग प्रणायाम करते रहें सभी सगे संबंधियों से मेल मिलाप करते रहें बच्चे जीतने भी हो सब को बरबार प्यार दें एकलौता बच्चा है तो ज्यादा दूर ना भेजें फिर भी जाता है तो रोज
उस से वार्तालाप करते रहें जवानी में कमाया हुआ धन एक दम
खत्म ना करें एक या दो जीवन बीमा जरूर करवाएं पानी खूब पीते रहें भजन सत्संग आदि में ज्यादा ध्यान दें पड़ोसियों से ताल मेल बनाये रखें गाँव समाज से जुड़े रहें बुढ़ापा जीवन आपकी जरूर आनंदमय होगी
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