सामाजिक विषय -: क्या बेटी होना गुनाह है ?क्या बलात्कार मामले में भी जातिवाद देख कर कानून उसका पालन करती है ?
सितम्बर 29, 2020 यूपी का हाथरस जिला. यहां एक गांव में 14 सितंबर की सुबह 19 साल की एक दलित लड़की का गैंगरेप हुआ. उसे ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया. फिर अलीगढ़ के अस्पताल ले जाया गया. वेंटिलेटर पर रही. फिर दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में एडमिट कराया गया. लेकिन उसे बचाने की सारी कोशिशें नाकाम रहीं. 29 सितंबर की सुबह उसकी मौत हो गई।
हद की बात है दरिंदों ने दलित बच्ची जिसका गैंग रेप के बाद दबंगों ने जीभ काटी, स्पाइन तोड़ दी, गला घोंटा,और यूपी पुलिस जिसने अभी कुछ दिन पहले एनकाउंटर में ज्यादा देर लगाई नहीं लेकिन गैंगरेप धारा लिखने में यूपी पुलिस को 8 दिन लगे थे।
क्या बेटी होना गुनाह है इसके साथ दलित होना भी गुनाह है
आज वो बेटी ज़िन्दगी की जंग हार गई सरकार प्रसाशन दलाल मीडिया जो कंगना,रिया,हिंदू,मुस्लिम के इलावा आज कल कुछ करती नहीं हाँ यहाँ लोगों को एक हथनी के मरने का बहुत बड़ा दुःख होता है सोश्यल मीडिया में शोर मचाया जाता है
लेकिन एक बेटी के साथ जब -जब देश में बलात्कार हत्या होता है। हम सब खामोश हो जाते है बेटी गुड़िया का ही लो अभी तक मुजरिम पकड़े नहीं ।
यूपी में बेटी के साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गई,और यहाँ फिर भी मोदी,मोदी चिल्लाते विपक्ष भी इसमें दोषी है वे भी राजनीति के इलावा कुछ करती नहीं यहां मंत्री-संत्री खरीद फरोख्त के इलावा कुछ और इनको दिखता ही नहीं ।
योगी जी योगी सेना बनाते गये एक दलित बेटी का सामूहिक रेप हुआ उसकी जीभ काट दी गयी लेकिन योगी सेना बनाते बनाते कुछ दिखा ही नहीं। क्या यही था आपका बेटी बचाओ अभियान।
यूपी के हाथरस में जिस 19 साल की दलित लड़की मनीषा के साथ बलात्कार हुआ था।उसकी आज सुबह दिल्ली के सफ़दरजंग हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई मगर मीडिया में इस खबर को कोई तव्वजों नही दी जा रही,
हाथरस की दलित पीड़िता मनीषा का आवाज उठाना भी जाति देखकर शायद किया जा रहा। इंसाफ की आवाज उठाने के लिए सभी दलों के सब मुंह मे शायद दही जम गई है वहीं यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आये दिन टीवी पर बड़े बड़े दावे करके चले जाते है । कि प्रदेश में हिंसा की घटनाओं,बलात्कारियों, अपराध पर अगर किसी सरकार ने अंकुश लगाया है ।यह दावे खोखले है,अपराध में यूपी नंबर वन ये पूरा देश जानता है ।पीडिता मनीषा की यह पहली घटना नही है इस तरह की घटनाएं उत्तर प्रदेश में आये दिन होती रहती है लेकिन कोई मुंह खोलता नहीं ।
सच कहें तो अब अपराधों का न्याय भी जाति देखकर किया जाता है।आपको याद होगा प्रियंका रेड्डी के केस में छोटे से छोटे और बड़े से बड़े नेताओं ने जल्द से जल्द अपराधियों को पकड़ने के लिए दिन रात एक कर दिए थे ट्वीटर से लेकर टीवी तक बस सभी उनके न्याय के लिए आवाज बुलंद कर रहें थे मगर अब सब हाथ पे हाथ रखकर कोरोना वायरस की तरह मुंह में मास्क लगा कर छुप चाप बैठे हैं ।
दलित हितैषी मायावती महलों से बाहर निकले भी तो क्यो? क्योंकि अब वो भी बीजेपी की कठपुतली बनकर नाच रही है। वोटबैंक के लिए दलितों की आटा चक्की बन जाती है बस नामात्र का ट्विटर पर एक ट्वीट कर देती है बात खत्म।
एक बार फिर से आम जानता को आगे आना होगा। मेरी जनता से निवेदन है कि की देश की बेटी को न्याय दिलाने के लिए आगे आए और हल्ला बोले व्हाट्सएप,फेसबुक,ट्विटर,इंस्टा आदि में सभी जाँच की गुहार लगाये और बेटी मनीषा को न्याय दिलवाने में सहयोग करें

